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कोरोना वायरस पर टेम्परेचर का कितना पड़ता है असर, जानने के लिए शुरू हुए शोध

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तापमान का कोरोना वायरस पर असर पड़ता है या नहीं, इसे लेकर शोध किए जा रहे हैं। वैज्ञानिक अभी किसी सटीक निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग के अध्यक्ष प्रो. डीसी लाल ने कोरोना से दुनियभार में अब तक हुई मौतों पर किए गए अध्ययन के बाद दावा किया है कि जिन देशों का तापमान कम होता है वहां गर्म देशों की तुलना में ज्यादा मौतें हुई हैं।

प्रो. लाल ने मार्च के अंत से ही इस पर अध्ययन शुरू कर दिया था। बताया कि दुनिया के कुल 195 देशों में से 82 ऐसे हैं, जहां का औसत वार्षिक तापमान 20 डिग्री सेल्सियस कम रहता है तो भारत सहित 113 देशों में औसत वार्षिक तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा रहता है। डॉ. लाल का दावा है कि पांच अप्रैल को सर्द देशों में कोरोना से 95 प्रतिशत मौतें हुईं थीं तो वहीं गर्म देशों में सिर्फ तीन प्रतिशत मौतें हुईं थी। जबकि 21 अप्रैल को सर्द देशों में 95 प्रतिशत तो गर्म देशों में पांच प्रतिशत मौतें हुईं थी।

डॉ. लाल ने विश्व के पांच सर्द देशों (अमेरिका, इटली, स्पेन, फ्रांस और यूके) तथा पांच गर्म देशों (ब्राजील, मैक्सीको, भारत, इंडोनेशिया और इक्वाडोर) में हुई मौतों पर भी अध्ययन किया है। उनका दावा है कि पांच शीर्ष सर्द देशों में 71 प्रतिशत तो पांच शीर्ष गर्म देशों में 2.7 प्रतिशत मौतें हुईं हैं। बकौल डॉ. लाल कोरोना प्रभावित अफ्रीकी महाद्वीप के गर्म देशों में 1100 मौतें हुईं है वहीं यूरोप महाद्वीप के कोरोना प्रभावित सर्द देशों में एक लाख से अधिक मौतें हुईं हैं।
डॉ. लाल कहते हैं कि मैक्सीको और अमेरिका, वियतनमान और चीन के आधार पर किए गए अध्ययन में भी यह बात सामने आई है कि सर्द देशों में मौतें गर्म देशों की तुलना में ज्यादा हैं। बकौल डॉ. लाल इटली में ही उत्तरी इटली जो सर्द है, वहां ज्यादा तो अपेक्षाकृत गर्म दक्षिणी इटली में कम मौतें हुईं। इसी प्रकार उत्तरी अमेरिका में ज्यादा तो दक्षिणी अमेरिका में मौतों की संख्या कम है।

तापमान का पड़ता है असर
इविवि सेंटर ऑफ एटमॉस्फिरिक एण्ड ओशियन स्टडीज के कोआर्डिनेटर प्रो. सुनीत द्विवेदी कहते हैं कि कोविड-19 पर तापमान का कितना असर है, इस बारे में अभी स्पष्ट तौर पर कुछ कहना तो उचित नहीं होगा पर पुराने कोरोना वायरस पर हुए अध्ययन में यह पाया गया था कि चार डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान और आर्द्रता ज्यादा हो तो वायरस के फैलने की संभावना कम रहती है। लेकिन कोविड-19 का वायरस पुराने वायरस से अलग और ज्यादा खतरनाक है इसलिए इस पर तापमान के पड़ने वाले प्रभाव के बारे में कुछ स्पष्ट तौर पर कहना अभी उचित नहीं होगा। हां, चीन और इटली के पांच-पांच बड़े स्थानों को लेकर तापमान, आद्रता, हवा की रफ्तार पर हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि तापमान का असर पड़ता है, कितना पड़ता है यह अभी स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा सकता है। तापमान ज्यादा होने से वायरस के मालीक्यूल से होने वाले प्रभाव की अवधि कम हो जाती है।