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कोरोना योद्धाओं को दिल से सलाम:13 माह के बच्चे को मकान मालिक के पास छोड़ डॉक्टर कपल कर रहा मरीजों का इलाज

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अपने 13 माह के मासूम को मकान मालिक के सहारे छोड़कर एक डॉक्टर दंपति मरीजों का उपचार कर रहा है। पति-पत्नी की ड्यूटी अलग-अलग अस्पतालों में लगाई गई है। दोनों आपातकालीन विभाग में ड्यूटी कर रहे हैं, जहां मरीजों के उपचार के साथ ही उनकी स्क्रीनिंग का काम चल रहा है।

डॉक्टर राजीव रंजन दादा देव अस्पताल में तैनात हैं, जबकि उनकी पत्नी डॉ. रश्मि आचार्य भीझू अस्पताल में तैनात हैं। दोनों की ड्यूटी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में लगी हुई है। आचार्य भीझू अस्पताल में आइसोलेशन और फ्लू वार्ड बनाया गया है, जबकि दादा देव में सिर्फ फ्लू वार्ड बनाया गया है, जहां आपातकालीन विभाग में आने वाले मरीजों की स्क्रीनिंग करने के बाद शिफ्ट किया जा रहा है। अगर कोई मरीज कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है तो उसे आरएमएल और डीडीयू में रेफर किया जा रहा है।

डॉक्टर दंपति ने कहा कि कोरोना को लेकर लोगों को घबराने की जगह सावधानी बरतने की जरूरत है। लोग लॉकडाउन का पालन करें और घरों में ही रहें।

कई दिनों से घर नहीं गए: मरीज स्क्रीनिंग के बाद अगर वह पॉजिटिव पाए जाते हैं, तो उन्हें कोरोना वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाता है। कोरोना वार्ड या फिर कोरोना अस्पताल में उनका उपचार शुरू होता है। ऐसे में स्क्रीनिंग और उपचार के समय स्टाफ को कोरोना संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है। लिहाजा, डॉक्टर दंपति ने पिछले कई दिनों से घर आना बंद कर दिया है और बच्चे की देखरेख मकान मालिक कर रहे हैं।

बच्चों को वीडियो कॉल करते हैं: डॉक्टर दंपति ने बताया कि बच्चा 13 माह का ही है और संक्रमण की चपेट में जल्दी आ सकता है। दोनों ने निर्णय लिया कि वे अस्पताल से घर नहीं जाएंगे। घर में मौजूद बच्चे की देखरेख का सबसे बड़ी चिंता थी। ऐसे में उन्होंने अपने मकान मालिक से मदद मांगी। बच्चे की मकान मालिक ही देखरेख करते हैं। दोनों हर तीन घंटे बाद वीडियो कॉल के जरिए बच्चे की सुध लेते हैं।